Friday, 19 May 2017

सिप के साथ स्विप करें म्यूचुअल फंड (Reposted)

सिस्टमैटिक इनवेस्टमेंट प्लान (सिप) इस समय म्यूचुअल फंड में निवेश का सबसे लोकप्रिय तरीका बन गया है जिसमें नियमित अंतराल पर रकम निवेश की जाती है। लेकिन इनके सिस्टमैटिक विदड्रॉअल प्लान (एसडब्ल्यूपी या स्विप) भी हैं जिनसे निवेशक नियमित अंतराल पर कुछ पैसा अपने निवेश में से निकाल सकते हैं। निकाला गया पैसा किसी ओर योजना में निवेश किया जा सकता है या फिर कुछ ओर खर्चों के लिए इसका उपयोग कर सकते हैं। अमूमन स्विप को सेवानिवृत्ति के बाद होने वाले नियमित खर्चों को पूरा करने के लिए अच्छे से उपयोग किया जा सकता है।
स्विप से नियमित अंतराल के बाद कुछ नियत राशि निकाली जा सकती है। यह निकासी मासिक, तिमाही, छमाही या वार्षिक स्तर पर कर सकते हैं। इस योजना में समय अंतराल निवेशक को अपनी जरूरत और प्रतिबद्धताओं के अनुसार चुनना चाहिए। स्विप के कई लाभ हैं।  यह आपके निवेश से एक नियमित समय अंतराल के बाद आपको आपकी चाही गई रकम तो देते ही हैं, साथ में आपकी मूल रकम सीधे बाजार में निवेश रहती है, तो निवेश पर वापसी बहुत अच्छी होने की उम्मीद होती है। आपका मूल निवेश मुद्रास्फ़ीति से भी दो-दो हाथ करता रहता है और स्विप आपका भविष्य सुरक्षित करने में मददगार साबित होता है।
स्विप में आप शेयर बाजार के उतार चढ़ाव को भी झेल सकते हैं। नियमित अंतराल के बाद रकम निकासी से औसत मूल्य अच्छा मिलता है और निवेशक बाजार के उतार चढ़ाव का फायदा ले सकता है।
स्विप कैसे काम करती है: जब आप म्यूचुअल फंड खरीदते हैं तो उसे स्विप में ले सकते हैं। इसमें आपको बताना होता है कि कितना रुपया हर महीने/तिमाही में कौन-सी तारीख को चाहिए। जिस दिन म्यूचुअल फ़ंड खरीदा जाता है, उस दिन की एनएवी (शुद्ध आस्ति मूल्य) की दर से आपको आपके निवेश की यूनिटें मिल जाती हैं। फ़िर अगले महीने से आपकी चाही गई रकम उन यूनिटों में से बेचकर आपको दे दी जाती हैं। इससे फ़ायदा यह है कि अगर लंबी अवधि में देखें तो हम बाजार के उतार-चढ़ाव बहुत ज्यादा पाएंगे और ये उनसे लड़ने में सक्षम हैं।
उदाहरण: एक व्यक्ति वर्ष 2002 में सेवानिवृत्त हुए। उन्होंने वित्तीय विशेषज्ञ की सेवाएं लीं और अपनी सेवानिवृत्ति राशि का 20 लाख रुपया स्विप में लगाने का निर्णय लिया। उन्होंने 9 जुलाई 2002 को रिलायंस ग्रोथ ग्रोथ म्यूचुअल फ़ंड लिया। 9 जुलाई 2002 की एनएवी 31.185 रुपए थी और उन्हें 64,133.3975 यूनिट मिलीं।
अब हर माह उन्हें शुरू की दो तारीख को ही 20,000 रुपए मिल जाते थे, और उन्होंने उसे आज तक जारी रखा है, जैसा कि आप सभी ने देखा है कि इन पिछले आठ वर्षों में बाजार ने अपने कई उतार चढ़ाव देखें हैं और कई बने हैं और कई बर्बाद हुए हैं। आज अगर उनके फ़ंड की उन्नति को देखा जाए तो आप पाएंगे कि पिछले आठ वर्षों में उन्होंने स्विप से 19.20 लाख लाख रुपये तो निकाले ही हैं और आज उनके पास 45,577.8792 यूनिट उपलब्ध हैं जिसकी एनएवी 459.8468 रुपए है। और, कुल निवेश की राशि आज हो गई है दो करोड़ से भी ज्यादा। जी हाँ बिल्कुल सही पढ़ा आपने उनकी आज की रकम है 2,05,69,602.25 रुपए।
कर प्रावधान: अभी तक पहले वर्ष शार्ट टर्म कैपिटल गैन टैक्स देना होता है। जितनी यूनिट आपकी बाजार में बिकी हैं, उस हर यूनिट पर होने वाले फ़ायदे पर और एक वर्ष के बाद लांग टर्म कैपिटल गैन टैक्स से मुक्त है। पर इंडेक्सेशन से कर लगता है। लेकिन नई कर संहिता में लांग टर्म कैपिटल गैन टैक्स की फ़िर से बहाली की गई है, जिसमें निवेशक को हर यूनिट पर होने वाले फ़ायदे पर अब एक वर्ष की अवधि के बाद भी कर देना होगा और इंडेक्सेशन के ऊपर भी कर देय होगा। लेकिन इतना कर देने के बाबजूद भी यह योजना बहुत ही अच्छी है, जोखिमपूर्ण भी है। पर इसके रिटर्न की तुलना किसी और वित्तीय उत्पाद से करना बहुत ही मुश्किल है।
वित्तीय विशेषज्ञ की सेवाएं: मेरी राय है कि जब आप बाजार आधारित कोई भी उत्पाद खरीदते हैं, और अगर खुद विशेषज्ञ नहीं हैं तो वित्तीय विशेषज्ञ की समय समय पर सेवाएं जरुर लें जो आपके धन को सुरक्षित रखने में आपकी मदद करेगा। जैसे पहले उदाहरण में वित्तीय विशेषज्ञ की सेवाएं केवल निवेश के समय ही ली गईं। अगर नियमित रुप से लेते तो यही रकम लगभग चार करोड़ हो गई होती। वित्तीय विशेषज्ञ अपनी सेवाओं के लिए कुछ मामूली सा शुल्क लेते हैं। पर हमें वह शुल्क ज्यादा लगता है। अगर थोड़ा-सा शुल्क देकर आपको अपने निवेश से ज्यादा बेहतर वापसी मिल रही है तो हर्ज ही क्या है।
- विवेक रस्तोगी (लेखक वित्तीय मामलों के विशेषज्ञ हैं और कल्पतरु नाम का अपना ब्लॉग भी चलाते हैं। यह लेख उसी ब्लॉग से साभार लिया गया है)
(Source : Earthkam)

Tuesday, 29 March 2011

धानुका एग्रीटेक

धानुका एग्रीटेक कृषि रसायनों के अलावा उर्वरक व बीज भी बनाती है। तीन दशक पुरानी कंपनी है। इसके शेयर सिर्फ बीएसई (कोड – 507717) में ही लिस्टेड हैं। पिछले वित्त वर्ष के आखिरी दिन 31 मार्च 2011 को इसने 50.20 रुपए पर अपनी तलहटी पकड़ी थी। कल 28 मार्च 2011 को यह एकबारगी 6.73 फीसदी बढ़कर 73.70 रुपए पर बंद हुआ है, वो भी 2.31 लाख शेयरों के अच्छे-खासे वोल्यूम के साथ जिसमें से 88.58 फीसदी शेयर डिलीवरी के लिए थे। इस भाव पर उसका शेयर अभी 7.57 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा है, जबकि शेयर के भाव व बुक वैल्यू का अनुपात 2.79 है।


इंडिया इनफोलाइन के आंकड़ों के अनुसार धानुका एग्रीटेक का इक्विटी पर रिटर्न (RoE) 43.9 फीसदी और नियोजित पूंजी पर रिटर्न (RoCE) 40.2 फीसदी है। इसे काफी आकर्षक माना जाएगा। कल ही कंपनी के मुख्य वित्त अधिकारी सीएफओ वी के बंसल ने बताया है कि कंपनी एक बीज की फर्म का अधिग्रहण करने जा रही है। साथ ही उसके साणंद संयत्र में नई उत्पादन सुविधा मार्च 2012 तक शुरू हो जाएगी। इस विस्तार पर कंपनी 35-40 करोड़ रुपए खर्च कर रही है। कंपनी के पास इस समय साणंद सहित कुल चार कृषि रसायन संयंत्र हैं। बाकी तीन संयंत्र गुडगांव व सोहना (हरियाणा) और ऊधमपुर (जम्मू-कश्मीर) में हैं।

नयी इकाई के चालू होने के बाद कंपनी ने अगले तीन साल में अपना कारोबार दोगुना करके 1000 करोड़ रुपए तक पहुंचाने का लक्ष्य बनाया है। चालू वित्त वर्ष 2010-11 में कंपनी अभी तक 500 करोड़ रुपए का कारोबार हासिल कर चुकी है। इसकी औपचारिक घोषणा उसने इसी महीने 10 मार्च को की थी। पिछले वित्त वर्ष 2009-10 में उसका कारोबार 407.53 करोड़ रुपए था, जिस पर उसने 36.34 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ कमाया था। दिसंबर 2010 की तिमाही में उसने 113.11 करोड़ के कारोबार पर 12.42 करोड़ का शुद्ध लाभ कमाया है। इस दौरान साल भर पहले की तुलना में उसका कारोबार 19.5 फीसदी और शुद्ध लाभ 46.29 फीसदी बढ़ा है।

कंपनी के सीएफओ बंसल के मुताबिक कंपनी अगले वित्त वर्ष में अपना ध्यान डीलर नेटवर्क बढ़ाने और किसानों में कृषि रसायन के इस्तेमाल व इसके प्रति जागरूकता बढाने के अभियान पर ध्यान देगी। फिलहाल कंपनी के पास 6500 डीलर और करीब 60,000 रिटेलर हैं। उसका दावा है कि उसके उत्पाद देश के एक करोड़ किसानों तक पहुंचते हैं। कंपनी कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) के तहत गुडगांव, जालंधर व भोपाल के नजदीक किसानों को शिक्षित-प्रशिक्षित करने के लिए ‘धानुका चौपाल’ भी चला रही है। इसके अलावा कंपनी ने गुडगांव में मिट्टी परीक्षण की एक प्रयोगशाला भी बना रखी है।

जाहिर-सी बात है कि देश में कृषि भूमि की उपलब्धता सीमित है। इसलिए फसलों की पैदावार बढ़ाने के लिए कृषि रसायनों की दरकार होगी ही होगी। इसलिए धानुका एग्रीटेक जैसी जिन कंपनियों ने इस क्षेत्र में अपना धंधा जमा रखा है, उनका भविष्य उज्ज्वल ही होना है। हालांकि एक बात नोट करने की है कि कंपनी की 10 करोड़ रुपए की इक्विटी में प्रवर्तकों की हिस्सेदारी 74.99 फीसदी है। हो सकता है कि कंपनी के प्रवर्तक अपनी हिस्सेदारी इस सीमा से नीचे लाने की कोशिश में हों। इसलिए शेयरों को खास हवा दी जा रही है। खैर जो भी, इस शेयर में हाल-फिलहाल बढ़ने की अच्छी गुंजाइश है।

यह शेयर ऊपर में 103.38 रुपए (24 अगस्त 2010 तक जा चुका है। हालांकि उस दिन का वास्तविक भाव 516.80 रुपए का था। लेकिन सही तुलना के लिए हम यहां उसे पांच से भाग देकर लिख रहे हैं क्योंकि कंपनी का 10 रुपए अंकित मूल्य का शेयर 4 सितंबर 2010 से 2 रुपए अंकित मूल्य के पांच शेयरों में बांट दिया गया है। कंपनी की इक्विटी में एफआईआई की मौजूदा हिस्सेदारी 8.25 फीसदी है। कंपनी के कुल शेयरधारकों की संख्या 4449 है। रेलिगेयर फिनवेस्ट ने उसके 8,11,500 शेयर (1.62 फीसदी इक्विटी) खरीद रखे हैं।

Monday, 27 September 2010

स्टरलाइट टेक्नो में 30% प्लस

स्टरलाइट टेक्नोलॉजीज (बीएसई कोड – 532374, एनएसई कोड – STRTECH) में इधर एक तरह की चाल बनती हुई नजर आ रही है। हालांकि पिछले ही महीने 3 अगस्त को उसने 124.20 रुपए पर 52 हफ्ते का उच्चतम स्तर हासिल किया है। इस समय गिरकर 99.95 रुपए पर आ गया है। लेकिन बाजार के जानकारों के मुताबिक इसमें फिर हलचल बढ़ने जा रही है और यह 130 रुपए तक जा सकता है। यह अनिल अग्रवाल से जुड़ी वेदांता समूह की कंपनी है। पावर कंडक्टर और ऑप्टिकल फाइबर केबल बनाती है। इनका इस्तेमाल बिजली व टेलिकॉम क्षेत्र में होता है और ये दोनों ही क्षेत्र बराबर बढ़ रहे हैं और बढ़ते ही रहेंगे।

कंपनी बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए ऑप्टिकल फाइबर से लेकर पावर कंडक्टर की क्षमता बढ़ाने के काम में लगी है। क्षमता विस्तार पर वह करीब 400 करोड़ रुपए खर्च करेगी। कंपनी के पास इस समय 2600 करोड़ रुपए के ऑर्डर हैं। इसका 70 फीसदी हिस्सा बिजली क्षेत्र से आया है। उसकी मुख्य ग्राहक अभी तक सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां रही हैं। लेकिन धीरे-धीरे वह निजी क्षेत्र को भी अपने दायरे में ले रही है।

कंपनी ने वित्त वर्ष 2009-10 में 2431.63 करोड़ रुपए की आय पर 246.07 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ कमाया था। चालू वित्त वर्ष में जून 2010 की पहली तिमाही में उसकी आय 491.76 करोड़ रुपए और शुद्ध लाभ 55.58 करोड़ रुपए रहा है। कंपनी का ठीक पिछले बारह महीने (टीटीएम) का ईपीएस (प्रति शेयर लाभ) 7.19 रुपए है। उसके शेयर की बुक वैल्यू 26.42 रुपए है। इस तरह शेयर इस समय बुक वैल्यू से 3.78 गुना और ईपीएस से 13.9 गुना चल रहा है। लेकिन अगर साल भर का नजरिया रखें तो वित्त वर्ष 2011-12 में इसका ईपीएस 9.3 रुपए होगा। वह भी तब पहले जारी किए वारंटों के शेयर में बदलने से इक्विटी बढ़ चुकी है। भावी संभावना के आधार पर ही शेयर के 130 रुपए तक जाने का आकलन किया गया है।

Thursday, 23 September 2010

कल का बीमा है आईडीबीआई

आईडीबीआई बैंक (बीएसई कोड – 500116, एनएसई कोड – IDBI) में निवेश के बारे में हम पिछले दो महीने से लिख रहे है। चक्री चमत्कार कॉलम में इसे खरीदने की सलाह बराबर दी जाती रही है। 7 जून को जब हमने खुलकर इसे खरीदने को कहा था, तब इसका भाव था 111.90 रुपए। और, यह बढ़ते-बढ़ते कल 52 हफ्ते की चोटी 147.30 रुपए पर पहुंच गया। हालांकि बंद हुआ 146.50 रुपए पर। असल में 1 सितंबर को जब से इसने चालू व बचत खातों पर लगभग सारे शुल्क खत्म करने का फैसला किया है, तब से इसकी चाल तेज हो गई है। हर दिन थोड़ा-थोड़ा बढ़ रहा है।
हम पहले भी कह चुके हैं और अब भी कहते हैं कि आईडीबीआई बैंक भविष्य में स्टेट बैंक से टक्कर लेने की सामर्थ्य रखता है। इसलिए इसे मौजूदा स्तर भी ले लेना लंबे समय के लिए फायदे का सौदा है। हालांकि अगर आपने हमारी सलाह पर 7-8 जून के आसपास इसे खरीद लिया होगा तो आपको 30 फीसदी से अधिक का फायदा अब तक ही मिल चुका होगा।
सार्वजनिक क्षेत्र का बैंक है। लेकिन रंग-ढंग में निजी क्षेत्र के बैंकों एचडीएफसी बैंक या आईसीआईसीआई बैंक से कमतर नहीं है। इसने खुद को विकास के कामों से जुड़ी वित्तीय संस्था से बैंक के रूप में तब्दील किया है। ब्रांडिंग जबरदस्त तरीके से की है। हाथी और बच्चे वाला विज्ञापन याद है न। कामकाज का बेहद प्रोफेशनल रवैया है। बीमा कंपनी या म्यूचुअल फंड जहां भी हाथ डाला, एकदम संजीदा तरीके से काम कर रहा है। यूनाइटेड वेस्टर्न बैंक के विलय के बाद इसे कई साल पहले ही रिटेल ग्राहकों का अच्छा आधार मिल चुका है। इस समय आईडीबीआई बैंक का ठीक पिछले बारह महीनों (टीटीएम) का ईपीएस (प्रति शेयर लाभ) 11.28 रुपए और इसका शेयर 12.99 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा है। इसके शेयर की बुक वैल्यू ही इस समय 117.79 रुपए है।
आगे की बात करें तो बैंक चालू ब बचत खातों (कासा) की संख्या बढ़ाकर अपने फंड की लागत घटाने में लगा है। यह सच है कि उसकी कुल जमा में कासा का योगदान 14 फीसदी के आसपास है। लेकिन वह इसे तेजी से बढ़ाने में लगा है और अभी तक की सूचना के मुताबिक इस महीने से की गई पहल पर उसे ग्राहकों का अच्छा रेस्पांस मिल रहा है।
बैंक में सरकार की इक्विटी 52.67 फीसदी है, जबकि घरेलू संस्थाओं के पास इसके 20.08 फीसदी शेयर हैं। बैंक अपने नए सीएमडी आर एम मल्ला के नेतृत्व में आगे भी कई नई पहल करने वाला है। थोड़े में बस इतना ही कहना है कि इस शेयर को लंबे समय के लिए बटोर कर रख लेना चाहिए। यह सुरक्षा देने में किसी भी अच्छी से अच्छी बीमा पॉलिसी से कम नहीं साबित होगा।
(सौ. : अर्थकाम)

Sunday, 12 September 2010

Polaris: Buy for a target of Rs211

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